करवा चौथ 2026: तारीख, पूजा मुहूर्त, चंद्रोदय समय, कथा और व्रत विधि

अक्टूबर की हल्की ठंडक शुरू होते ही बाज़ारों में चूड़ियों, मेहंदी और सजी हुई पूजा की थालियों की रौनक दिखने लगती है। यही संकेत है कि करवा चौथ आने वाला है। सुहागिन महिलाओं के लिए यह सबसे प्रिय व्रतों में से एक है, जिसमें आस्था, प्रेम और सखियों का साथ एक साथ दिखता है।

अगर आप जानना चाहते हैं कि करवा चौथ 2026 कब है, पूजा का शुभ समय क्या है और इसके पीछे की कहानी क्या है, तो यह लेख आपके लिए है।

करवा चौथ 2026 की तारीख और शुभ मुहूर्त

करवा चौथ का व्रत कार्तिक मास (अमांत पंचांग में आश्विन) के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को रखा जाता है। 2026 में दिल्ली के अनुसार समय इस प्रकार है:

  • तारीख: बुधवार, 28 अक्टूबर 2026
  • पूजा का शुभ मुहूर्त: शाम लगभग 5:39 बजे से 6:56 बजे तक
  • चंद्रोदय (दिल्ली): रात लगभग 8:14 बजे
  • चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 28 अक्टूबर को दोपहर 1:06 बजे

ध्यान रखें कि अलग-अलग शहरों में चंद्रोदय के समय में 15 से 45 मिनट तक का अंतर हो सकता है। इसलिए व्रत खोलने से पहले अपने शहर का सही समय स्थानीय पंचांग में ज़रूर देखें।

करवा चौथ क्या है और क्यों मनाया जाता है?

“करवा” का अर्थ है मिट्टी का घड़ा और “चौथ” का अर्थ है चतुर्थी। इस दिन विवाहित महिलाएँ सूर्योदय से चंद्रमा के दर्शन तक उपवास रखकर अपने पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी जीवन की कामना करती हैं। यह दिन संकष्टी चतुर्थी के साथ भी पड़ता है, जो भगवान गणेश को समर्पित है, और इसके कुछ दिन बाद अहोई अष्टमी आती है।

कई लोग मानते हैं कि यह पर्व पुराने समय की कृषि परंपरा से जुड़ा है, जब गेहूँ की बुवाई के मौसम में महिलाएँ अच्छी फसल और परिवार की सुरक्षा की प्रार्थना करती थीं। एक और मान्यता यह है कि जब पुरुष लंबे समय के लिए युद्ध या व्यापार पर बाहर जाते थे, तब महिलाएँ यह व्रत रखती थीं और आपस में “करवा बहन” का रिश्ता बनाती थीं। यह परंपरा आज भी चलती है।

करवा चौथ की प्रचलित कथाएँ

रानी वीरवती की कथा। यह सबसे प्रसिद्ध कथा है। सात भाइयों की इकलौती बहन वीरवती ने शादी के बाद पहला करवा चौथ मायके में रखा। शाम होते-होते वह भूख-प्यास से बेहाल हो गई। भाइयों से बहन की हालत देखी न गई, तो उन्होंने पेड़ के पीछे दीपक और दर्पण की मदद से नकली चाँद बना दिया। वीरवती ने उसे असली चाँद समझकर व्रत खोल लिया और तुरंत उसे पति के निधन की खबर मिली। दुखी होकर उसने पूरे मन से तपस्या और प्रार्थना की, और उसकी निष्ठा से उसका पति फिर जीवित हो गया।

करवा और मगरमच्छ की कथा। एक अन्य कथा में पतिव्रता करवा ने अपने पति को मगरमच्छ से बचाने के लिए उसे कच्चे धागे से बाँध दिया और यमराज से उसे दंड देने की प्रार्थना की।

द्रौपदी की कथा। महाभारत के अनुसार, जब पांडव संकट में थे, तब भगवान श्रीकृष्ण की सलाह पर द्रौपदी ने यह व्रत रखा था।

कथाओं के विवरण अलग-अलग क्षेत्रों में थोड़े बदल जाते हैं, लेकिन सबका संदेश एक ही है कि श्रद्धा, धैर्य और प्रेम हर कठिनाई को पार कर सकते हैं।

करवा चौथ के नियम और परंपराएँ

1. सरगी (सूर्योदय से पहले)। दिन की शुरुआत भोर में सरगी से होती है, जो परंपरा से सास की ओर से दी जाती है। इसमें फल, मेवे, मिठाई, मठरी और दूध या नारियल पानी होता है, जिससे दिन भर ऊर्जा बनी रहती है।

2. निर्जला व्रत। ज़्यादातर महिलाएँ चंद्रोदय तक अन्न-जल ग्रहण नहीं करतीं। अगर कोई बीमार, गर्भवती या बुजुर्ग हैं, तो डॉक्टर और घर के बड़ों की सलाह से हल्का व्रत रखना बेहतर है।

3. सोलह श्रृंगार। महिलाएँ लाल, मरून या चटख रंग के वस्त्र पहनती हैं, हाथों में मेहंदी लगाती हैं और सोलह श्रृंगार करती हैं।

4. शाम की पूजा। थाली में दीपक, रोली, चावल, जल से भरा करवा और छलनी रखी जाती है। शिव-पार्वती, गणेश और कार्तिकेय की पूजा होती है और सब मिलकर करवा चौथ की कथा सुनती हैं।

5. चंद्र दर्शन। चाँद निकलने पर महिलाएँ छलनी से चंद्रमा को देखती हैं, फिर उसी छलनी से पति का चेहरा देखती हैं। चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है, और पति के हाथ से जल पीकर व्रत पूरा किया जाता है।

घर पर आसान पूजा विधि

पूजा स्थान को साफ करके शिव-पार्वती और गणेश जी की तस्वीर रखें। करवे में जल भरें और ऊपर ढक्कन में थोड़े चावल और दीपक रखें। रोली-तिलक करें, फूल और मिठाई चढ़ाएँ और कथा पढ़ें। इसके बाद थाली को सखियों के घेरे में सात बार घुमाएँ, जिसे “फेरे” कहा जाता है। अंत में बड़ों के चरण छूकर आशीर्वाद लें।

क्या करें और क्या न करें

  • सरगी में फल और प्रोटीन वाला संतुलित भोजन लें।
  • पूजा की सामग्री दोपहर तक तैयार रखें।
  • अपने शहर का चंद्रोदय समय पहले से देख लें।
  • व्रत से एक दिन पहले पानी पर्याप्त पिएँ।
  • इस दिन काले रंग के कपड़े पहनने से परहेज़ करें।
  • किसी पर उसकी सेहत के खिलाफ व्रत रखने का दबाव न डालें।

करवा चौथ के पारंपरिक पकवान

व्रत खोलने के बाद परिवार में पूरी, आलू की सब्ज़ी, हलवा, खीर, छोले और पनीर के व्यंजन बनाए जाते हैं। लंबे उपवास के बाद पहला भोजन हल्का और आसानी से पचने वाला रखना अच्छा रहता है।

बदलते समय में करवा चौथ

आज यह पर्व पुरानी सीमाओं से आगे बढ़ चुका है। कई पति भी पत्नी के साथ उपवास रखते हैं, अविवाहित लड़कियाँ अच्छे जीवनसाथी की कामना से व्रत करती हैं, और दूर रहने वाले परिवार वीडियो कॉल पर साथ में पूजा करते हैं। इस दिन का असली सार कृतज्ञता और साथ निभाने की भावना है, और हर परिवार इसे अपनी सुविधा से मना सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

करवा चौथ 2026 कब है?

करवा चौथ 28 अक्टूबर 2026, बुधवार को है।

करवा चौथ 2026 का पूजा मुहूर्त क्या है?

दिल्ली में लगभग शाम 5:39 से 6:56 बजे तक। शहर के अनुसार समय बदल सकता है।

करवा चौथ पर चाँद कब निकलेगा?

दिल्ली में लगभग रात 8:14 बजे, बाकी शहरों में कुछ अंतर हो सकता है।

क्या अविवाहित लड़कियाँ करवा चौथ का व्रत रख सकती हैं?

हाँ, कई लड़कियाँ अच्छे जीवनसाथी की कामना से यह व्रत रखती हैं।

क्या व्रत में पानी पी सकते हैं?

परंपरा में नहीं, लेकिन स्वास्थ्य संबंधी समस्या होने पर डॉक्टर की सलाह से हल्का व्रत रखा जा सकता है।

निष्कर्ष

करवा चौथ सिर्फ एक व्रत नहीं, बल्कि प्रेम, परंपरा और अपनापन का उत्सव है। 28 अक्टूबर 2026 को कैलेंडर में चिह्नित कर लें, पूजा की थाली और सरगी पहले से तैयार रखें और परिवार के साथ इस शाम का आनंद लें।

आप सभी को करवा चौथ 2026 की हार्दिक शुभकामनाएँ!